Desk | Bhandara
देशभर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में 20 मई को भंडारा जिले सहित कई स्थानों पर मेडिकल दुकानों का बंद रखा गया। इस बंद का सबसे अधिक असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ा, जिन्हें जरूरी दवाएं लेने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भंडारा जिले में 600 से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम नागरिकों में चिंता का माहौल दिखाई दिया। भंडारा जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष निकेत क्षीरसागर ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जा रहा है।
उनका आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर दवाएं बेच रही हैं, जिससे छोटे मेडिकल दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। साथ ही बिना डॉक्टर की उचित जांच और सत्यापन के दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। संघटना का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग किया जा रहा है और कई बार नकली अथवा एआई द्वारा तैयार किए गए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए भी दवाएं खरीदी जा रही हैं। इससे एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं के दुरुपयोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीण और छोटे शहरों में काम करने वाले दवा विक्रेताओं को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।
बंद के दौरान जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि वे आवश्यक दवाओं के लिए सरकारी अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों और 24 घंटे चालू रहने वाली मेडिकल सेवाओं का उपयोग करें। कई अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रखे गए ताकि आपातकालीन मरीजों को परेशानी न हो। दवा विक्रेताओं ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं, अवैध ई-फार्मेसी पर कार्रवाई हो और स्थानीय मेडिकल दुकानदारों के हितों की रक्षा की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो भविष्य में और बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।
