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सब कुछ महंगा! आखिर कैसे चलेगा घर? महंगाई ने बिगाड़ा नागपुर के परिवारों का बजट लगातार बढ़ती महंगाई ने अब आम लोगों की कमर तोड़ दी है। रसोई गैस से लेकर सब्जियां, फल, किराना और नाश्ते तक हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। “इतनी महंगाई में आखिर घर कैसे चलाएं?” यह सवाल अब हर मध्यमवर्गीय परिवार और गृहिणी की सबसे बड़ी चिंता बन गया है। नागपुर शहर के कळमना, कॉटन मार्केट, इतवारी, महाल और गांधीबाग जैसे प्रमुख बाजारों में रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ने लगे हैं, जिससे लोगों का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। व्यापारियों के अनुसार बाहर से आने वाले माल की ढुलाई लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। ट्रक, मिनी ट्रक और मालवाहक वाहनों के किराए में 10 से 15 प्रतिशत तक इजाफा होने से सब्जियों, फलों और किराना सामान के दाम सीधे बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। टमाटर, प्याज, आलू और हरी सब्जियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से लोग परेशान हैं। कॉटन मार्केट में लाल प्याज का भाव 40 किलो के लिए 480 से 500 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यही प्याज 350 से 400 रुपये में मिल रहा था।
सफेद प्याज का भाव भी 650 से 660 रुपये प्रति 40 किलो तक पहुंच गया है। लहसुन और अदरक की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है। बाजार में लहसुन 160 से 200 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि अदरक का भाव 100 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले तीन से चार महीनों में लहसुन के दाम 400 से 500 रुपये किलो तक जा सकते हैं। टमाटर की कीमत 50 रुपये किलो तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 20 रुपये अधिक है। वहीं हरा धनिया भी 80 रुपये किलो बिक रहा है। फल बाजार की हालत भी कुछ अलग नहीं है। परिवहन खर्च बढ़ने से आम, सेब और अन्य फलों के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण इस साल आम की बिक्री में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। महंगाई की मार सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने ऑटो और निजी टैक्सी चालकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कई चालकों का कहना है कि दिनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा इंधन में ही खर्च हो जाता है। कुछ चालकों ने अपनी फेरे कम कर दी हैं, तो कई लोग किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर व्यावसायिक गैस सिलिंडर महंगा होने से होटल और खानावलों का खर्च भी बढ़ गया है। इसका असर अब नाश्ते और खाने की थालियों पर साफ दिखाई देने लगा है। चाय, पोहा, समोसा, कचोरी, थाली और फास्ट फूड के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। गांधीबाग इलाके में समोसा और कचोरी की एक प्लेट अब 40 से 50 रुपये तक पहुंच चुकी है। होटल संचालकों का कहना है कि गैस और परिवहन खर्च बढ़ने के कारण दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गई है। लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीवन मुश्किल कर दिया है। घर चलाने से लेकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन होता जा रहा है।
