Top 5 This Week

Related Posts

BHANDARA : पेट्रोल-डीजल महंगा

Desk | Bhandara

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव पेट्रोल और डीजल के दामों में फिर से 3-3 रुपये की बढ़ोतरी होने से ग्रामीण क्षेत्रों के आम नागरिकों, किसानों और मजदूरों का आर्थिक संतुलन बिगड़ने लगा है। एक तरफ ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में मजदूरी अब भी पुराने दर पर ही बनी हुई है। इससे मजदूरों और किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। पिछले 10 दिनों में दो बार ईंधन के दाम बढ़ने से महंगाई का असर और ज्यादा महसूस होने लगा है। रोजमर्रा के खर्चों का संतुलन बनाए रखना ग्रामीण परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। ईंधन महंगा होने का सीधा असर अब खेती-किसानी पर पड़ने वाला है।

नांगराई, जुताई, कीचड़ तैयारी, ढुलाई और ट्रैक्टर से होने वाले सभी कृषि कार्यों की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। पहले से ही बेमौसम बारिश, बढ़ते उत्पादन खर्च और धान को उचित कीमत न मिलने से किसान परेशान हैं। अब डीजल महंगा होने से खेती करना और भी खर्चीला हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के ट्रैक्टर मालिकों ने भी बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण किराया बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इससे खेत की जुताई से लेकर धान की ढुलाई तक हर काम महंगा हो सकता है। धान खरीद की सीमा (लिमिट) नहीं बढ़ने के कारण किसानों को मजबूरी में कम दाम पर धान बेचना पड़ रहा है।

उधर खाद, बीज और दवाइयों की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। अब ईंधन दरवृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर संकट की ओर धकेलने की आशंका बढ़ा दी है।  मजदूरी नहीं बढ़ने से ग्रामीण मजदूर भी आर्थिक संकट में फंस गए हैं। शासन से इस ओर ध्यान देने और मजदूरी बढ़ाने की मांग की जा रही है। किसानों का कहना है कि “धान का सही भाव नहीं मिल रहा और खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।”