डेस्क | Amravati
कुपोषण और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने छीनी मासूमों की सांस
मेळघाट एक बार फिर दर्द और बेबसी की तस्वीर बनकर सामने आया है। 2025-26 के सिर्फ एक साल में 358 बच्चों का मृत जन्म—यह आंकड़ा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह नाकामी की कहानी है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र चिखलदरा और धारणी तालुका हैं, जहां हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।
❗ कागज़ों में दावे, जमीनी हकीकत में मौत
सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार सुधार के दावे करते हैं, लेकिन हर साल सैकड़ों उपजत मौतें इन दावों की पोल खोल रही हैं।
🏥 अस्पताल दूर, सुविधाएं नदारद
दूरदराज के इलाकों में समय पर प्रेग्नेंसी जांच न हो पाने और आपातकालीन स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टरों व उपकरणों की कमी के कारण कई महिलाएं बेहद गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचती हैं। जिला महिला अस्पताल (डफरीन) में ही 261 मृत जन्म दर्ज होना स्थिति की गंभीरता दिखाता है।
⚠️ क्यों थम जाती हैं धड़कनें?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई खतरनाक कारण हैं:
गढ़चिरौली में महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौत का मुख्य कारण अकाल प्रसव (37 हफ्ते से पहले जन्म), मां का कुपोषण व एनीमिया, जन्म के समय संक्रमण व ऑक्सीजन की कमी तथा उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं।
❓ जिम्मेदार कौन?
जब एक तरफ “डिजिटल हेल्थ” और “आधुनिक चिकित्सा” की बातें होती हैं, तो दूसरी तरफ जन्म से पहले ही बच्चों की मौत सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब जरूरत है गढ़चिरौली में जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई, स्वास्थ्य सेवाओं में जमीनी सुधार और मेळघाट जैसे क्षेत्रों पर तत्काल विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
