Desk | Mumbai
डॉलर के मुकाबले 97.17 तक पहुंचा रुपया, बढ़ी आर्थिक चिंता
भारतीय रुपये में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। डॉलर के मुकाबले रुपया 97.17 के स्तर तक फिसल गया, जिसे आर्थिक विशेषज्ञ ऐतिहासिक गिरावट मान रहे हैं। रुपये की कमजोर स्थिति ने आम जनता से लेकर व्यापार जगत तक सभी की चिंता बढ़ा दी है। लगातार गिरते रुपये का सीधा असर महंगाई, आयात खर्च और विदेशी व्यापार पर पड़ने लगा है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेश में कमी रुपये की गिरावट के प्रमुख कारण हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाइयों और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा बोझ आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि रुपये में इतनी बड़ी गिरावट से विदेशी कर्ज का बोझ भी बढ़ेगा। जिन कंपनियों ने डॉलर में कर्ज लिया है, उन्हें अब अधिक भुगतान करना पड़ेगा। वहीं विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए भी खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है।
सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार में स्थिरता लाने के लिए आरबीआई द्वारा जरूरी कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है।
रुपये की यह गिरावट केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने वाली बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
