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Global | यूरेनियम भंडार पर भिड़े अमेरिका और ईरान सेनाएं अलर्ट

डेस्क | Global

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर गहरा गतिरोध पैदा हो गया है, जिससे मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और शांति वार्ता दोनों पर संकट मंडराने लगा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत फिलहाल “डेडलॉक” की स्थिति में पहुंच चुकी है।

यूरेनियम पर अड़ा अमेरिका
अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजे और परमाणु कार्यक्रम पर लंबे समय तक रोक लगाए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को जल्द समझौता करने की चेतावनी दी है।

ईरान ने अमेरिका की शर्तें ठुकराईं
वहीं ईरान ने अमेरिकी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम उसका संप्रभु अधिकार है और वह अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी भी दबाव में बाहर नहीं भेजेगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ, तो वह यूरेनियम संवर्धन को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार कर सकता है, जो हथियार-स्तर की क्षमता मानी जाती है।

युद्धविराम पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष और भड़क सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हाल के महीनों में युद्धविराम की कोशिशें हुई थीं, लेकिन मौजूदा गतिरोध ने उन प्रयासों को कमजोर कर दिया है।

रूस भी बातचीत में सक्रिय
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को अपने यहां स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह कुछ मात्रा में यूरेनियम को कम स्तर तक पतला करने पर विचार कर सकता है, लेकिन उसे देश से बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं है।

दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक शक्तियों ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। अगर बातचीत विफल होती है, तो आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में तनाव और गहरा सकता है।