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Nagpur | 3 करोड़ फर्जी अकाउंट हटाए पर कालाबाजारी अब भी जारी

डेस्क | Nagpur

रेलवे टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए करोड़ों फर्जी अकाउंट डिलीट किए जाने के बावजूद दलालों का नेटवर्क अब भी बेखौफ तरीके से सक्रिय है। आम यात्रियों को टिकट पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दलाल आसानी से टिकट बुक कर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।

🔴 यात्रियों की खुली लूट
रेलवे के रिजर्वेशन सिस्टम—चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन—पर दलालों ने कब्जा जमा लिया है। जैसे ही आम यात्री ऑनलाइन टिकट बुक करने की कोशिश करता है, उसे “सिस्टम जाम” का सामना करना पड़ता है। वहीं, दलाल चंद मिनटों में कई टिकट बुक कर लेते हैं और बाद में उन्हें महंगे दामों पर बेचते हैं।

🔴 50 से ज्यादा दलाल सक्रिय
जानकारी के अनुसार, एक ही दलाल कई पर्सनल यूजर आईडी का इस्तेमाल करता है, जो उसके रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर होती हैं। इतना ही नहीं, अवैध कमाई को छिपाने के लिए बैंक खातों का भी इसी तरह इस्तेमाल किया जाता है।
सिर्फ नागपुर में ही ऐसे 50 से ज्यादा दलाल सक्रिय बताए जा रहे हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में यह गोरखधंधा तेजी से फैल चुका है।

🔴 कार्रवाई सिर्फ दिखावा?
रेलवे प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। बुलढाणा में पिछले साल पकड़े गए बड़े रैकेट के मुंबई कनेक्शन और उस मामले की अनिश्चित स्थिति के बीच पिछले चार महीनों में नागपुर में केवल 2 दलालों पर कार्रवाई हुई है।

🔴 मिलीभगत का शक गहराया
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कार्रवाई के बाद भी कई दलालों के नाम सामने नहीं आते। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कहीं सिस्टम की लापरवाही है या फिर दलालों के साथ अंदरूनी मिलीभगत?

⚠️ बड़ा सवाल
जब 3 करोड़ फेक अकाउंट हटाए जा चुके हैं, तो फिर भी काला बाज़ार क्यों नहीं रुक रहा? क्या रेलवे सिस्टम में सुधार की जरूरत है या फिर इस पूरे खेल में अंदरूनी सांठगांठ है? फिलहाल, सबसे ज्यादा नुकसान आम यात्रियों को हो रहा है, जो हर बार टिकट के लिए संघर्ष कर रहे हैं।