डेस्क | Amravati
महाराष्ट्र के अमरावती ग्रामीण क्षेत्र में सामने आए ₹2.31 करोड़ के राशन धान्य घोटाले ने अब सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। आरोप है कि मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए शिकायत में नरमी बरती गई, लेकिन गाडगे नगर पुलिस ने समय रहते पूरा खेल बिगाड़ दिया।
करोड़ों की अनियमितता और एफआईआर
मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी निनाद लांडे ने 22 अप्रैल को दो अधिकारियों—जितेंद्र पाटील और चैताली यादव—के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि पाटील ने करीब ₹1.44 करोड़ और यादव ने लगभग ₹87 लाख का धान्य अनियमित तरीके से आवंटित किया।
शिकायत की धाराओं पर संदेह
चौंकाने वाली बात यह रही कि शिकायत में केवल ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत ही मामला दर्ज करने की बात कही गई थी, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत मिल सकती थी। इसी पर पुलिस को शक हुआ कि कहीं यह आरोपियों को बचाने की कोशिश तो नहीं।
पुलिस की सख्त कार्रवाई और नई धाराएं
गाडगे नगर पुलिस ने मामले की गंभीरता समझते हुए विधि अधिकारियों से सलाह ली और इसे सरकारी आर्थिक धोखाधड़ी का मामला मानते हुए ठगी (फ्रॉड) की धाराएं जोड़ दीं। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट को रिपोर्ट भेजकर पूरक शिकायत (सप्लीमेंट्री FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रशासनिक मिलीभगत पर उठे सवाल
अब नई धाराओं के जुड़ने के बाद आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या शुरुआत में जानबूझकर आरोपियों को राहत देने की कोशिश की गई थी।
जांच में जुटी पुलिस और भविष्य की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस जांच तेज कर दी गई है और इस बहुचर्चित घोटाले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
