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Nagpur : धीरेंद्र शास्त्री ने शिवाजी महाराज पर दिए बयान पर मांगी माफी

🔴 विवाद बढ़ा तो सामने आई सफाई और माफी 

डेस्क । नागपुर
Dhirendra Shastri ने Chhatrapati Shivaji Maharaj पर दिए अपने बयान को लेकर उठे विवाद के बाद खेद जताते हुए माफी मांग ली है। महाराष्ट्र में तीखी प्रतिक्रिया के बीच उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया, जिससे गलतफहमी पैदा हुई।

  “सम्मान जताने की थी मंशा, अर्थ बदला गया”
नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शिवाजी महाराज की संतों और अपने गुरु समर्थ रामदास के प्रति गहरी श्रद्धा को रेखांकित करना था। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज जैसे महान व्यक्तित्व का अपमान करना तो दूर, वे इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। उनके मुताबिक, भाषण का केवल एक छोटा हिस्सा दिखाकर पूरे आशय को बदल दिया गया।

 गुरु-शिष्य परंपरा का दिया हवाला
शास्त्री ने अपने बयान का संदर्भ समझाते हुए कहा कि वे गुरु-शिष्य परंपरा की बात कर रहे थे, जिसमें उन्होंने शिवाजी महाराज की अपने गुरु के प्रति निष्ठा का उदाहरण दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास और संत परंपरा में ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जिन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

 आहत भावनाओं पर जताया खेद, मीडिया से अपील
विवाद के बीच उन्होंने भावनात्मक स्वर में कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। साथ ही मीडिया से अपील की कि उनके पूरे बयान को दिखाया जाए, ताकि लोगों में भ्रम न फैले।

 आस्था बनाम अंधविश्वास पर भी रखा पक्ष
इसके अलावा, शास्त्री ने आस्था और अंधविश्वास के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समझ के साथ किया गया विश्वास ही आस्था है, जबकि बिना समझ के किया गया विश्वास अंधविश्वास बन जाता है। उनका दावा है कि वे लोगों को स्वयं से नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति से जोड़ने का काम करते हैं।

विवाद के पीछे साजिश की आशंका जताई
अंत में, उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर संतों और सनातन परंपरा को निशाना बनाते हैं और संभव है कि इस पूरे विवाद के पीछे भी कोई साजिश हो।