■ प्रशासन की लापरवाही से जनता बेहाल : राहगीर परेशान
Desk । Gadchiroli
पिछले छह सालों से कछुआ गति से चल रहा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 353-सी का निर्माण कार्य अब आम जनता के गले की फांस बन चुका है। आलापल्ली-सिरोंचा मार्ग पर स्थित मोसम और पुसूकपल्ली नालों पर पुलों का निर्माण आज तक अधूरा है। रही-सही कसर 22 जून की रात हुई मूसलाधार बारिश ने पूरी कर दी। बारिश के तेज बहाव में प्रशासन द्वारा बनाया गया अस्थायी वैकल्पिक रास्ता ताश के पत्तों की तरह बह गया, जिससे पूरी यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और वाहन चालक बीच रास्ते में फंस कर रह गए हैं।
■ भ्रष्टाचार की खुली पोल: उद्घाटन से पहले ही उखड़ी चमचमाती सड़क
कंट्रैक्टर और अफसरों की जुगलबंदी पर उठे गंभीर सवाल:
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि इस महामार्ग का काम ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से बेहद घटिया स्तर का किया जा रहा है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि अभी तक इस सड़क का आधिकारिक रूप से उद्घाटन भी नहीं हो पाया है, और उससे पहले ही रेपनपल्ली के पास हाल ही में किया गया डामरीकरण (सड़क की ऊपरी परत) बुरी तरह उखड़ कर बिखर गया है।
■ मिट्टी का ‘कच्चा खेल’: ठेकेदार की लापरवाही से लगीं वाहनों की लंबी कतारें
बजट को ताक पर रखकर बनाया था कमजोर रास्ता:
मोसम और पुसूकपल्ली नालों के बगल से प्रशासन ने सिर्फ मिट्टी का इस्तेमाल करके एक अस्थायी रास्ता तैयार किया था। इस रास्ते को एस्टीमेट (बजट प्रावधानों) के अनुसार मजबूत बनाने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी की गई, नतीजा यह हुआ कि मानसून की पहली ही भारी बारिश यह रास्ता झेल नहीं सका। ठेकेदार और अफसरों की इस घोर लापरवाही का खामियाजा भुगतते हुए सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं।
■ वीआईपी जिले का ‘फ्लॉप शो’: खुद मुख्यमंत्री के क्षेत्र में विकास की खुली पोल
पालकमंत्री के गढ़ में जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं:
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गढ़चिरौली जिले के पालकमंत्री खुद राज्य के मुख्यमंत्री हैं। इसके बावजूद क्षेत्र की ऐसी दयनीय और बदहाल स्थिति देखकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश और नाराजगी है। जनता सवाल उठा रही है कि जब मुख्यमंत्री के अपने प्रभार वाले जिले का यह हाल है, तो बाकी जगहों की क्या स्थिति होगी?
■ अब आर-पार के मूड में जनता: युद्ध स्तर पर काम शुरू करने की उठी मांग
प्रशासन को अल्टीमेटम, सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग देने की अपील:
हर साल मानसून के दौरान इस मार्ग पर यही दर्दनाक और विकट स्थिति पैदा हो जाती है। बार-बार की इस मुसीबत से तंग आकर अब स्थानीय नागरिकों ने सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से इस गंभीर समस्या पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मोसम और पुसूकपल्ली नालों पर पुल और सड़क का अधूरा काम युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए। साथ ही, जब तक यह काम पूरा नहीं होता, तब तक यातायात के लिए एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
