Desk | Bhandara
एजेंटों का आरोप यह हमारी रोजी-रोटी पर सीधा हमला, सरकार तुरंत बहाल करे पुराना कमीशन महाराष्ट्र के तुमसर में दैनिक बचत प्रतिनिधियों (पिग्मी एजेंटों) ने अपने कमीशन को 2.5 प्रतिशत तक सीमित करने वाले आदेश के विरोध में शुक्रवार को एकदिवसीय धरना और काम बंद आंदोलन किया। इस आंदोलन में सैकड़ों महिला और पुरुष एजेंट शामिल हुए। हड़ताल के कारण सहकारी पतसंस्थाओं के दैनिक लेन-देन प्रभावित हुए और करोड़ों रुपये के जमा संग्रह पर असर पड़ने की चर्चा सहकारिता क्षेत्र में रही। महाराष्ट्र राज्य पतसंस्था अभिकर्ता संघटना के जिला अध्यक्ष अनिल कारेमोरे के नेतृत्व में यह आंदोलन आयोजित किया गया। सहायक निबंधक, सहकारी संस्था कार्यालय के सामने बड़ी संख्या में एजेंट एकत्र हुए और सरकार के निर्णय के खिलाफ तीव्र नाराजगी व्यक्त की।
आंदोलनकारियों ने सहायक निबंधक के माध्यम से सहकार आयुक्त एवं निबंधक, सहकारी संस्था महाराष्ट्र राज्य तथा महाराष्ट्र राज्य सहकारी पतसंस्था फेडरेशन को ज्ञापन सौंपा। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि एजेंटों की मांगों को राज्य सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद एकदिवसीय आंदोलन समाप्त कर दिया गया। पिग्मी एजेंटों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में वृद्धि, यात्रा खर्च और दैनिक जरूरतों की बढ़ती लागत के बीच कमीशन को 2.5 प्रतिशत तक सीमित करना हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा करने वाला फैसला है। उन्होंने कमीशन को कम से कम 4 प्रतिशत किए जाने की मांग की है। एजेंटों ने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित उपविधियों के तहत उनसे ऋण वितरण, ऋण वसूली और अन्य अतिरिक्त कार्य कराए जाते हैं, लेकिन इसके लिए किसी अलग पारिश्रमिक की व्यवस्था नहीं है। इस मुद्दे के समाधान के लिए 12 जून को पुणे में राज्यस्तरीय बैठक आयोजित की गई है। एजेंटों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिला। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए सहायक निबंधक प्रमोद हुमणे स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन स्वीकार किया।
