Desk | Yavatmal
राज्य में कमाल भूमि धारण (सीलिंग) कानून के तहत वितरित की गई जमीनों को अब वर्ग-2 से वर्ग-1 में परिवर्तित किया जा सकेगा। इस निर्णय से सीलिंग के तहत मिली जमीनों की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण का रास्ता आसान होगा। राज्य के भूमि अभिलेख विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, वर्ग-2 की जमीन को वर्ग-1 में बदलने के लिए रेडी रेकनर मूल्य के 25 से 30 प्रतिशत तक शुल्क भरना होगा। शुल्क जमा करने और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद संबंधित जमीनधारकों को अनुमति प्रदान की जाएगी। इस निर्णय से किसानों, जमीन मालिकों और उत्तराधिकारियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब जमीन के स्तांतरण, बिक्री और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएंगी। किन क्षेत्रों में कितना शुल्क लगेगा? विभिन्न महानगरपालिकाओं और नगर परिषद क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। सामान्यतः जमीन के रेडी रेकनर मूल्य के 25 से 30 प्रतिशत तक शुल्क लिया जाएगा। कौन-सी जमीनें पात्र होंगी? सीलिंग कानून के तहत प्राप्त वैध जमीनों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
हालांकि, जिन जमीनों पर न्यायालयीन विवाद, अतिक्रमण या अन्य कानूनी अड़चनें होंगी, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा जा सकता है। 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले मामलों पर सरकार की नजर जिन मामलों में जमीन का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक होगा, उन पर सरकार विशेष स्तर पर विचार करेगी और अंतिम मंजूरी उच्च स्तर से दी जाएगी। ‘सीलिंग’ क्या है? कमाल भूमि धारण (सीलिंग) कानून के तहत सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक जमीन रखने वाले किसानों या व्यक्तियों की अतिरिक्त जमीन अधिग्रहित कर जरूरतमंदों में वितरित की जाती है। ऐसी वितरित जमीन को सामान्यतः सीलिंग भूमि कहा जाता है। पहले क्या नियम था? पहले वर्ग-2 की जमीन को वर्ग-1 में बदलने की अनुमति नहीं थी। जमीन की बिक्री या हस्तांतरण के लिए सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य था, जिससे प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी। अधिकारियों का क्या कहना है? राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस निर्णय से जमीन संबंधी लेन-देन अधिक पारदर्शी और सुगम होगा। साथ ही लाभार्थियों को अपनी जमीन पर अधिक अधिकार और स्वतंत्रता मिलेगी।
