Desk | Akola
जिलेभर में बढ़ रही मरीजों की संख्या के कारण शासकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) और सर्वोपचार अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। जीएमसी के वार्ड नंबर 39 और 32 में मरीजों को बेड की बजाय जमीन पर इलाज कराना पड़ रहा है। कुछ मरीज तो सीधे फर्श पर लेटकर उपचार लेते हुए दिखाई दिए, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है। गर्मी के बाद बढ़े संक्रामक रोग, बुखार, पेट दर्द, खाद्य विषाक्तता और अन्य बीमारियों के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके चलते अस्पताल में उपलब्ध बेड कम पड़ रहे हैं। प्रशासन ने अस्थायी तौर पर एक बेड पर दो मरीजों को रखने का विकल्प अपनाया है, लेकिन फिर भी कई मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है और उन्हें वार्ड में चादर बिछाकर जमीन पर ही इलाज कराना पड़ रहा है।
मरीजों की संख्या के मुकाबले बेड और डॉक्टर कम मरीजों के परिजनों का कहना है कि जीएमसी में मेडिकल वार्ड, प्रसूति विभाग और गैर-संक्रामक रोगों के विभागों में बड़ी संख्या में मरीज भर्ती हो रहे हैं। लेकिन बढ़ती मरीज संख्या के मुकाबले बेड, डॉक्टरों और नर्सों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव बढ़ गया है और मरीजों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अतिरिक्त बेड और रिक्त पद भरने की मांग नागरिकों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करे, खाली पदों को भरे और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए। 750 मंजूर बेड, लेकिन 1200 मरीज भर्ती! शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ है। अस्पताल में स्वीकृत बेड की संख्या 750 है, जबकि वास्तविकता में करीब 1200 मरीज इलाज करा रहे हैं। यही कारण है कि कई मरीजों को बेड की जगह जमीन पर इलाज करवाना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल में 750 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या क्षमता से कहीं अधिक होने के कारण डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों पर भी काम का दबाव बढ़ गया है। नागरिकों ने मांग की है कि रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए और अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाई जाए।
