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GONDIA : CSR प्रोजेक्ट या करोड़ों का जाल?

Desk | Gondia

‘सीएसआर प्रोजेक्ट’ के नाम पर 14.45 लाख रुपये की ठगी पैसे दोगुने करने का लालच नागपुर और मुंद्रा के दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज  कम समय में निवेश की गई रकम को दोगुना करने का लालच देकर यहां के दो व्यवसायियों से कुल 14 लाख 45 हजार रुपये की ठगी किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने ‘सीएसआर प्रोजेक्ट’ में निवेश करने पर भारी मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाकर वर्ष 2024 से धोखाधड़ी की। शिकायतकर्ता मोहम्मद इरशाद मोहम्मद अमीन कुरेशीवाला (48), निवासी रानी लक्ष्मीबाई चौक, गोंदिया, जरी का भवानी क्षेत्र में ‘रुजान डीडी’ नाम से व्यवसाय करते हैं। उनकी पहचान दिलीप मुनिश्वर और उनके मित्र लिलेश ठोकरे के माध्यम से भंवरलाल ढोके से हुई। ढोके ने अपने मित्र विजय शालिकराम बर्मन से परिचय कराया। बर्मन ने बताया कि वह ‘सीएसआर प्रोजेक्ट’ से जुड़ा है और इसमें निवेश करने पर तीन महीने में पैसा दोगुना हो जाएगा।

इसके बाद भंवरलाल ढोके ने भरत कांबले के साथ मिलकर भरोसा स्थित प्राजी राज नामक स्थान पर बैठक बुलाई। बैठक में बताया गया कि यह प्रोजेक्ट कंपनी के संचालक मंडल से जुड़ा है, निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और कम समय में रकम वापस मिल जाएगी। इस आश्वासन पर इरशाद कुरेशीवाला ने निवेश करने का निर्णय लिया। बड़े मुनाफे की उम्मीद में उन्होंने 6 फरवरी 2024 को लिलेश ठोकरे के माध्यम से 7 लाख रुपये आरटीजीएस द्वारा केनरा बैंक खाते में जमा किए। इसके अलावा 5 फरवरी 2024 को 7 लाख 45 हजार रुपये भी उसी बैंक खाते में भेजे गए। कुछ राशि नकद रूप में रखने की बात भी बताई गई। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने फोन कर बताया कि संबंधित कंपनी पर ‘रोक’ आदेश लगने के कारण प्रोजेक्ट बंद हो गया है और डीडी रद्द कर दी गई है। साथ ही 27 लाख रुपये मिलने का आश्वासन दिया गया। हालांकि डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी निवेश की गई राशि वापस नहीं की गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने ‘वेब ट्रस्ट एंड डीलर्स’ नामक खाते से 51 लाख रुपये के लेनदेन का दिखावा कर उनका विश्वास जीता। लेकिन 9 जुलाई 2025 को पता चला कि संबंधित बैंक खाता बंद है। आरोप है कि शिकायतकर्ता, उसके भाई और अन्य मित्रों को ‘सीएसआर प्रोजेक्ट’ के नाम पर फर्जी दस्तावेज, प्रोजेक्ट की रूपरेखा और विभिन्न वित्तीय योजनाएं दिखाकर पैसे ऐंठे गए। इस मामले में शहर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(3), 3(5) तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक बलीराम भारती कर रहे हैं। चेक बाउंस होने से खुला राज कुरेशीवाला के नाम से 15 लाख रुपये का एक चेक दिया गया था। जब उसे 7 जुलाई 2025 को बैंक में जमा किया गया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद 16 जुलाई को दूसरा चेक जमा किया गया, लेकिन वह भी क्लियर नहीं हुआ। इसके बाद की गई जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज, ‘वेब ट्रस्ट एंड डीलर्स’, ‘सीएसआर प्रोजेक्ट’ और भ्रामक आश्वासनों के जरिए निवेश करवाया था। पैसे लौटाने के बजाय फर्जी लेनदेन दिखाकर विश्वासघात किया गया।