Desk | Amravati
बारिश से पहले खेतों तक रास्ता उपलब्ध कराने की मांग तेज, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप तालुका क्षेत्र में वर्षों से लंबित पाणंद सड़कों के निर्माण को लेकर किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। बारिश का मौसम नजदीक आते ही खेतों तक पहुंचने के लिए रास्तों की समस्या और गंभीर हो गई है। इसी मुद्दे को लेकर लोकविकास संगठन के नेतृत्व में किसानों ने तहसील कार्यालय परिसर में अनोखा ‘सो जाओ’ आंदोलन कर शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। आंदोलन के दौरान किसान तहसील कार्यालय के सामने जमीन पर लेट गए और प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर केवल आश्वासन देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
कई गांवों में आज भी किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए कच्चे और कीचड़युक्त रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे खेती-किसानी का काम प्रभावित हो रहा है। किसानों ने बताया कि तालुका में अनेक पाणंद सड़क प्रस्ताव महीनों से मंजूरी की प्रतीक्षा में पड़े हैं। वहीं जिन कामों को मंजूरी मिल चुकी है, उनकी शुरुआत भी अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में बारिश शुरू होने के बाद स्थिति और भयावह हो जाती है। खेतों तक ट्रैक्टर, बैलगाड़ी या अन्य वाहन नहीं पहुंच पाते, जिससे बीज, खाद और कृषि उपकरण ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार किसानों को फसल को सिर पर उठाकर या पैदल कीचड़ से गुजरकर खेतों तक पहुंचाना पड़ता है। दोलनकारियों ने कहा कि बारिश के दिनों में पाणंद रास्ते पूरी तरह दलदल में बदल जाते हैं। इससे खेती का खर्च बढ़ने के साथ-साथ समय की भी बर्बादी होती है। किसानों का आरोप था कि प्रशासन हर साल बारिश से पहले सड़क निर्माण के दावे करता है, लेकिन हकीकत में हालात जस के तस बने रहते हैं।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “खेत तक सड़क पहुंचाओ”, “पावसाळ्यापूर्वी पाणंद रस्ते पूर्ण करा”, “किसानों को राहत दो” और “प्रशासन होश में आओ” जैसे नारों से तहसील परिसर को गूंजा दिया। आंदोलन में शामिल किसानों ने मांग की कि सरकार तत्काल विशेष निधि जारी कर पाणंद सड़कों का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू करे, ताकि बारिश के मौसम में किसानों को राहत मिल सके। लोकविकास संगठन के पदाधिकारियों ने तहसीलदार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। संगठन का कहना है कि किसानों की समस्याओं को लेकर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष काम दिखाई देना चाहिए। इस आंदोलन में लोकविकास संगठन के अध्यक्ष गोपाल भालेराव, रमन लंगोटे, श्याम पारिसे, ऋषिकेश रडके, जावेद पठाण, आकाश खेलदार, प्रवीण लंगोटे, अमर लंगोटे सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों की एकजुटता और अनोखे आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।
