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WARDHA: जिले में कैंसर का कहर, ओरल कैंसर ने बढ़ाई चिंता

DESK | WARDHA

जिले में सामने आए नए स्वास्थ्य आंकड़ों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अन्य बीमारियों की तुलना में जिले में कैंसर मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 81 प्रतिशत मरीज कैंसर से प्रभावित पाए गए हैं। सबसे चिंाजनक बात यह है कि जिले में मुख कैंसर (ओरल कैंसर) के मामलों में अनुमानित संख्या की तुलना में लगभग छह गुना बढ़ोतरी हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मुख, स्तन और गर्भाशय मुख कैंसर का समय रहते पता चल जाए तो इनका इलाज संभव है और कई मामलों में इन्हें पूरी तरह रोका भी जा सकता है। पिछले पांच वर्षों की तुलना में बीते वर्ष कैंसर के मामलों में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे जिले में व्यापक स्तर पर “प्रतिबंधात्मक स्वास्थ्य क्रांति” अभियान चलाने की अपील की है।

चौंकाने वाले आंकड़े मुख कैंसर के अनुमानित 127 मामलों की तुलना में 732 मरीज सामने आए हैं। यह लगभग 476 प्रतिशत की वृद्धि है
स्तन कैंसर के अनुमानित 199 मामलों के मुकाबले 446 मरीज मिले हैं, जो करीब 124 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।गर्भाशय मुख कैंसर के अनुमानित 123 मामलों की तुलना में 223 मरीज पाए गए हैं, यानी करीब 81 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।देशभर में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जिले की स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही है।

नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपने और परिवार के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। अभिभावकों से कहा गया है कि वे अपनी बेटियों को नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में एचपीवी वैक्सीनेशन जरूर दिलाएं। साथ ही वयस्कों को तंबाकू सेवन तुरंत बंद करने और जरूरत पड़ने पर नशा मुक्ति केंद्र की मदद लेने की सलाह दी गई है। महिलाओं को स्तन और गर्भाशय मुख कैंसर की नियमित जांच कराने का भी आग्रह किया गया है।

मुख कैंसर और तंबाकू का गहरा संबंध
जिले में 80 प्रतिशत से अधिक मुख कैंसर के मामले तंबाकू सेवन से जुड़े पाए गए हैं। इसमें धूम्रपान के अलावा खर्रा, गुटखा और मिश्री जैसे धूम्ररहित तंबाकू पदार्थ भी शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू छोड़ना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

एचपीवी वैक्सीन से गर्भाशय मुख कैंसर से बचाव
गर्भाशय मुख कैंसर ऐसा कैंसर है जिसे टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है। भारत सरकार की ओर से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह वैक्सीन एक डोज में दी जाती है और पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इसके गंभीर दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं और यह लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है।

स्तन कैंसर में समय पर जांच जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने पर इलाज अधिक प्रभावी होता है और मृत्यु दर में काफी कमी लाई जा सकती है। महिलाओं को नियमित मेडिकल जांच, हर महीने स्वयं स्तन परीक्षण और समय-समय पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी गई है।