डेस्क | Gadchiroli
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ तालुका से एक बेहद अहम और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। मलेरिया प्रभावित क्षेत्र माने जाने वाले इस इलाके में कार्यरत लैब सुपरवाइजर Suraj Yeglopwar ने महज 6 महीनों में दो दुर्लभ मलेरिया परजीवियों की पहचान कर नया रिकॉर्ड बनाया है।
🔬 क्या है पूरा मामला?
नवंबर 2025 में Plasmodium malariae और अप्रैल 2026 में Plasmodium ovale जैसे दुर्लभ परजीवियों का सफलतापूर्वक पता लगाया गया है, जिसमें सबसे खास बात यह है कि दोनों मरीज कभी राज्य से बाहर नहीं गए थे, जो इस खोज को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
🏥 कठिन परिस्थितियों में बड़ी उपलब्धि
मलेरिया के हॉटस्पॉट माने जाने वाले भामरागढ़ तालुका में सूरज येग्लोपवार रोजाना 70–80 रक्त नमूनों की माइक्रोस्कोप से जांच करते हैं, जो मलेरिया की अलग-अलग प्रजातियों की पहचान करने जैसा बेहद जटिल और विशेषज्ञता वाला काम है।
🏆 मिला सम्मान
उनकी इस उत्कृष्ट सेवा को देखते हुए महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर Ashish Jaiswal के हाथों और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें “उत्कृष्ट सेवा गौरव पुरस्कार 2025-26” से सम्मानित किया गया।
⚠️ क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण?
दुर्लभ मलेरिया प्रजातियों की पहचान से न केवल सटीक इलाज और रोकथाम में मदद मिलेगी, बल्कि इससे प्रशासन को मलेरिया नियंत्रण के लिए नई रणनीति बनाने में भी बड़ी सहायता प्राप्त होगी। दूर-दराज और संवेदनशील क्षेत्र में काम करते हुए यह उपलब्धि न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।
