Desk | Amravati
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता Vijay Wadettiwar ने राज्य में दारूबंदी के मुद्दे पर सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दारूबंदी से लोगों को नशामुक्ति मिलती है, यह दावा वास्तविकता से कोसों दूर है। वडेट्टीवार ने इस पूरे मुद्दे पर चल रही बहस को ही “फालतू चर्चा” करार दिया। वडेट्टीवार ने कहा कि जिन राज्यों ने पहले दारूबंदी लागू की थी, उन्हें बाद में फिर से शराब बिक्री शुरू करनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि दारूबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार लगातार जारी है। पुणे में जहरीली और नकली शराब से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसी घटनाएं दारूबंदी की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
गड़चिरोली जिले का उदाहरण देते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि वहां आदिवासी समुदाय को महुआ के फूलों से शराब बनाकर सेवन करने का कानूनी अधिकार है। उन्होंने सवाल किया, “फिर दारूबंदी आखिर किसके लिए है?” उनके अनुसार, एक समुदाय को कानूनी छूट और दूसरे पर प्रतिबंध लगाना नीतिगत विरोधाभास को दर्शाता है। इस दौरान उन्होंने महायुति सरकार के भीतर बढ़ रहे मतभेदों पर भी निशाना साधा। वडेट्टीवार ने कहा कि यदि सरकार के मंत्री और विधायक ही यह शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें पर्याप्त निधि नहीं मिल रही, तो फिर सत्ता में बने रहने का औचित्य क्या है। उन्होंने कहा, “सत्ता में रहकर सरकार के खिलाफ बोलना जनता भी देख रही है।” वडेट्टीवार ने दावा किया कि महायुति के घटक दलों के बीच दूरी लगातार बढ़ रही है और सरकार के भीतर असंतोष साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता एक ही दल के हाथों में केंद्रीकृत हो गई है, जिसके कारण सहयोगी दलों में नाराजगी और आंतरिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है।
