Desk | Bhandara
जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन के आदेशों की अवहेलना करते हुए वैनगंगा नदी के पात्र में ‘जलसमाधि आंदोलन’ करने के मामले में कारधा पुलिस ने कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं सहित करीब 40 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। घटना को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है, जबकि इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, 15 मई को विभिन्न मांगों को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वैनगंगा नदी के पात्र में उतरकर जलसमाधि आंदोलन किया था। इस आंदोलन में तत्कालीन कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहन पंचभाई, गोंदिया जिला अध्यक्ष दिलीप बंसोड, जिला परिषद अध्यक्ष कविता उईके, प्यारेलाल वाघमारे, मधुकर दोनोडे, रमेश टेंभरे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए थे। आंदोलनकारियों ने नदी के भीतर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रशासन का कहना है कि आंदोलन से पहले संबंधित आयोजकों द्वारा अनुमति मांगी गई थी, लेकिन तहसील कार्यालय और कारधा पुलिस ने सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इसकी अनुमति देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी करते हुए नदी के पात्र में उतरकर प्रदर्शन किया। बताया गया है कि जिस समय यह आंदोलन किया गया, उस दौरान जिले में जमावबंदी लागू थी। ऐसे में किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन या भीड़ एकत्रित करने पर प्रतिबंध था। प्रशासन ने दावा किया है कि आंदोलनकारियों को पहले ही इस संबंध में सूचित किया गया था, लेकिन उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से आंदोलन समाप्त करने तथा कानून का पालन करने के लिए भी कहा गया था, किंतु आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। सूत्रों के अनुसार, आंदोलन के दौरान अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया था। साथ ही शासन की अधिसूचना और जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेशों की जानकारी भी दी गई थी। इसके बावजूद आंदोलन जारी रहने के कारण प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
इस मामले में पुलिस सिपाही रमेश काले की शिकायत पर कारधा पुलिस थाने में कांग्रेस नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है तथा आंदोलन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस कार्रवाई को लेकर जिले में राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं का मानना है कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना जनता का अधिकार है, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन को कानून और निर्धारित नियमों के दायरे में रहकर ही आयोजित किया जाना चाहिए। ऐसे में यह मामला अब केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैनगंगा नदी में किए गए इस जलसमाधि आंदोलन और उसके बाद दर्ज हुए मामले ने जिले में प्रशासन और विपक्ष के बीच चल रहे तनाव को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होती है।
