Desk | Nagpur
500 मेगावाट यूनिट चार दिनों में दो बार बंद; खापरखेड़ा बिजली परियोजना का मामला नागपुर जिले के सावनेर तहसील स्थित महाऔष्णिक विद्युत उत्पादन केंद्र की खापरखेड़ा बिजली परियोजना में एक बार फिर तकनीकी खराबी सामने आई है। परियोजना की 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट पिछले चार दिनों में दो बार बंद हो चुकी है, जिससे बिजली उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है। इस खराबी के पीछे बॉयलर ट्यूब लिकेज मुख्य कारण बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले यूनिट नंबर 7 में बॉयलर ट्यूब में रिसाव पाया गया था। इस तकनीकी समस्या के कारण बिजली उत्पादन तत्काल रोकना पड़ा। संबंधित इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके बाद यूनिट को फिर से चालू किया गया था।
लेकिन कुछ ही घंटों में दोबारा वही समस्या उत्पन्न हो गई, जिसके चलते यूनिट को दूसरी बार बंद करना पड़ा। बिजली परियोजना के अधिकारियों के मुताबिक, बॉयलर विभाग में अत्यधिक दबाव और उच्च तापमान के बीच काम होता है। ऐसी स्थिति में ट्यूब में मामूली दरार आने पर भी स्टीम लिकेज हो सकता है, जिससे पूरी प्रणाली प्रभावित होती है। इसी कारण सुरक्षा के मद्देनजर यूनिट को तुरंत बंद करना आवश्यक हो जाता है। इस घटना से राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी कुछ हद तक दबाव बढ़ गया है। गर्मी के मौसम और बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट का बंद होना गंभीर माना जा रहा है। महावितरण और महाजनको की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए बिजली आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। लगातार हो रही तकनीकी खराबियों के कारण परियोजना की देखभाल और मरम्मत व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने उपकरणों की नियमित जांच, समय पर मेंटेनेंस और बॉयलर सिस्टम का सेफ्टी ऑडिट बेहद जरूरी हो गया है। अन्यथा भविष्य में बड़े तकनीकी हादसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित विभाग को जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यूनिट को फिर से पूरी क्षमता के साथ शुरू करने के लिए मरम्मत कार्य तेजी से जारी होने की जानकारी दी गई है।
