Desk | Buldhana
बारिश से पहले घाट सड़कों का सेफ्टी ऑडिट बेहद जरूरी; मानसून में बदहाल हो जाते हैं रास्ते लगातार हो रही भारी बारिश के कारण घाट क्षेत्रों में होने वाली भीषण दुर्घटनाओं ने इस वर्ष राज्य में मौतों का नया रिकॉर्ड बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में बुलढाणा जिले के विभिन्न घाट मार्गों की खतरनाक स्थिति एक चिंाजनक हकीकत बनकर सामने आई है। बोथा घाट, अंजिंठा मार्ग, गिरडा घाट, भेंडाळा घाट, मढी घाट, किनगांव राजा और मलकापुर-बुलढाणा मार्ग की घाट सड़कों के धंसने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इन मार्गों की सुरक्षा जांच और मरम्मत की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। बुलढाणा जिले की भौगोलिक संरचना पहाड़ी होने के कारण यहां कई घाट मार्ग हैं, जो पर्यटन और आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अंजिंठा गुफाएं, प्राकृतिक घाटियां और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए रोजाना भारी वाहन, एसटी बसें, मालवाहक ट्रक और निजी वाहनों की आवाजाही इन रास्तों से होती है।
लेकिन कई स्थानों पर सड़कें धंस चुकी हैं, अंधे मोड़ मौजूद हैं, रिफ्लेक्टर फीके पड़ चुके हैं, दिशा सूचक बोर्ड नहीं हैं और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है। इससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में बोथा घाट में हुई दर्दनाक दुर्घटना ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर कर दिया। हादसे में दो युवक गहरी खाई में गिर गए थे, जिनके शव काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाले गए। बारिश के मौसम में सड़कें फिसलनभरी हो जाती हैं, पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरता है तथा घने कोहरे के कारण दृश्यता कम हो जाती है। ऐसे में वाहन चालकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। समृद्धि महामार्ग पर लगातार हो रहे हादसों के बाद अब जिले की घाट सड़कों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले घाट मार्गों की जांच, मरम्मत, सुरक्षा दीवारों का निर्माण और चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए। जिले के बोथा घाट, अंजिंठा मार्ग, गिरडा घाट, पळस दर्रा, किनगांव राजा घाट और मलकापुर-बुलढाणा मार्ग के कई हिस्सों में सड़क किनारे सुरक्षा रेलिंग तक नहीं हैं। भूस्खलन वाले क्षेत्र, फिसलनभरे मोड़ और दिशा सूचक बोर्डों की कमी के कारण रात के समय वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। दुर्घटना होने पर राहत और बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी होती है, जिससे कई बार घायलों को समय पर मदद नहीं मिल पाती। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग संयुक्त रूप से सभी घाट मार्गों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट करें। साथ ही भूस्खलन प्रभावित हिस्सों की मरम्मत, खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय और खराब सड़कों का काम जल्द पूरा किया जाए। नागरिकों का कहना है कि मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis द्वारा कुछ महीने पहले निर्देश दिए जाने के बावजूद जिले में घाट सड़कों का सुरक्षा ऑडिट अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
