Desk | Akola
इलाज के दौरान घायल मां की हुई थी मौत छोटी-सी बात को लेकर अपनी ही मां पर लोहे के सब्बल से हमला कर गंभीर रूप से घायल करने वाले आरोपी बेटे को अतिरिक्त न्यायालय ने चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला अकोट फैल थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी ने गुस्से में आकर अपनी मां पर जानलेवा हमला किया था। उपचार के दौरान घायल महिला की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 अगस्त 2023 की सुबह फरियादी महिला ने मोबाइल रिचार्ज कराने के लिए बाहर जाने की बात अपने बेटे संजय पुंडलिक खंडारे से कही थी। मामूली बात पर आरोपी भड़क उठा और गुस्से में आकर घर में रखा लोहे का सब्बल उठाया। इसके बाद उसने अपनी मां के सिर और बाएं हाथ पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल होकर घर में ही गिर पड़ी।
महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायल अवस्था में उन्हें तुरंत शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला का उपचार शुरू किया, लेकिन हालत लगातार गंभीर बनी रही और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही अकोट फैल पुलिस ने आरोपी संजय पुंडलिक खंडारे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 325 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि पीड़ित महिला अपने छोटे बेटे संजय के साथ रहती थीं। आरोपी की पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी और वह अक्सर मानसिक तनाव में रहता था। पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तेजवंत सिंह ए. संधू की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 326 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को चार वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को सात दिन का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। हालांकि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने आरोपी को धारा 302 और 325 के आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही न्यायालय ने आरोपी द्वारा हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया। प्रकरण में सरकार पक्ष की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता मंगेश मानकर और क्षितिज अनोकार ने पैरवी की। अंतिम बहस मंगेश मानकर ने की। वहीं पैरवी अधिकारी एएसआई सुनील दीपकवार, एएसआई अनवर खान (सीएमएस सेल) तथा एएसआई धनभर ने जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया में सरकारी पक्ष को सहयोग प्रदान किया।
