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WARDHA : बोर्ड नहीं लेगा परीक्षा!

Desk | Wardha

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के तहत कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2025-26 से चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। हालांकि, तीसरी भाषा की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा। सीबीएसई की नई गाइडलाइन के अनुसार छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना अनिवार्य रहेगा। बोर्ड का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य विद्यार्थियों की भाषाई क्षमता को बढ़ाना और भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन देना है। स्कूलों पर होगी मूल्यांकन की जिम्मेदारी नई व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा की परीक्षा सीबीएसई द्वारा आयोजित नहीं की जाएगी। छात्रों का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर होगा। इसके लिए स्कूलों को पाठ्यक्रम, शिक्षण और मूल्यांकन की जिम्मेदारी निभानी होगी।

बोर्ड परीक्षा के परिणाम पर नहीं पड़ेगा असर यदि कोई छात्र तीसरी भाषा में अपेक्षित दक्षता हासिल नहीं कर पाता है, तो इसका प्रभाव उसके 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम पर नहीं पड़ेगा। इससे छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव नहीं बढ़ेगा। स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा सीबीएसई ने स्कूलों को क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकों के उपयोग की अनुमति दी है। इससे छात्रों को अपनी मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। 15 जून से उपलब्ध हो सकती हैं पुस्तकें एनसीईआरटी विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। संभावना है कि छात्रों को 15 जून से नई पुस्तकों की उपलब्धता शुरू हो जाएगी, ताकि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके। 1 जुलाई से शुरू होगी नई व्यवस्था नई शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा व्यवस्था को 1 जुलाई से लागू किया जाएगा। स्कूलों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के लिए कुछ समय दिया गया है। स्कूलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कई स्कूलों में विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था, प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्कूलों के लिए बड़ी चुनौती होगी। नई व्यवस्था से छात्रों को बहुभाषी शिक्षा का लाभ मिलेगा, वहीं भारतीय भाषाओं के अध्ययन और संरक्षण को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।