Desk | Akola
अकोला शहर के तारफैल और गडंकी क्षेत्र में मुंबई-कोलकाता रेलवे मार्ग के किनारे पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से किए गए अतिक्रमण को मध्य रेलवे ने हटा दिया। इस संयुक्त कार्रवाई के कारण 199 परिवारों को अपने घर खाली करने पड़े और मानसून शुरू होने से ठीक पहले कई परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। रेलवे प्रशासन ने इससे पहले अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 31 मई तक जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद कई लोगों ने स्वयं ही अपने घर खाली कर दिए। 2 जून को रेलवे प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी में व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। 164 निर्माण हटाए गए इस अभियान के दौरान लगभग 164 कच्चे और पक्के निर्माण हटाए गए। रेलवे की करीब 22,750 वर्गमीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस भूमि की अनुमानित कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये है। भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किया गया था। अभियान में इंजीनियरिंग विभाग के 160 कर्मचारी 300 स्थानीय पुलिसकर्मी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के 50 जवान शासकीय रेलवे पुलिस (GRP) के 25 कर्मचारी 7 जेसीबी मशीनें शामिल रहीं। तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए खाली हुई जमीन रेलवे प्रशासन के मुताबिक, अतिक्रमण मुक्त कराई गई इस जमीन का उपयोग प्रस्तावित तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि फरवरी महीने से अतिक्रमण हटाने के प्रयास शुरू थे और लगातार संवाद के बाद अधिकांश नागरिकों ने प्रशासन का सहयोग किया। प्रभावित परिवारों की परेशानी कार्रवाई के बाद कई परिवारों के सामने बेघर होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कुछ निवासियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 40 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे थे। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने जगह खाली कर दी, लेकिन अब उनके सामने पुनर्वास की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावित नागरिकों ने सरकार से वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। रेलवे क्षेत्र में वर्षों पुरानी अतिक्रमण की समस्या भले ही इस कार्रवाई से दूर हो गई हो, लेकिन मानसून से ठीक पहले सैकड़ों परिवारों के आश्रय का संकट गंभीर रूप ले चुका है।
