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WARDHA : दूध संकलन रुका, सड़क पर किसान

Desk | Wardha

दूध संकलन बंद होने से आजीविका पर संकट, कलेक्टर कार्यालय पर पहुंचकर किया प्रदर्शन वर्धा की ऐतिहासिक दुग्ध सहकारी संस्था ‘गोरस भंडार’ पर राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा छापेमारी कर संस्था को सील किए जाने और आगे दूध संकलन बंद करने के आदेश के बाद जिले के दूध उत्पादकों में भारी नाराजगी है। इस कार्रवाई से करीब 800 दूध उत्पादकों को बड़ा नुकसान हुआ है। इसी के विरोध में सैकड़ों दूध उत्पादकों ने दूध संकलन दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। गोरस भंडार के माध्यम से प्रतिदिन 11 गांवों के लगभग 12 हजार परिवारों से दूध संकलित किया जाता है। विभिन्न गांवों से डेढ़ से चार किलोमीटर दूर तक से दूध यहां लाया जाता है। संस्था पर हुई कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल है और किसानों को अब दूध बेचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ रही है। मदर डेयरी को भेजा जाएगा दूध जिलाधिकारी सी. ने दूध उत्पादकों को आश्वस्त किया कि गोरस भंडार में आने वाला दूध अब मदर डेयरी को भेजा जाएगा, जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सके। हालांकि कई

उत्पादकों का कहना है कि यह व्यवस्था उनके सभी समस्याओं का समाधान नहीं है और उन्हें अभी भी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। संस्था की छवि खराब करने वालों पर कार्रवाई की मांग दूध उत्पादकों ने मांग की है कि जिले की पहचान बन चुकी और वर्षों से दुग्ध व्यवसाय में योगदान देने वाली गोरस भंडार संस्था की छवि खराब करने वाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से जिले के हजारों दूध उत्पादकों को नुकसान हुआ है, इसलिए संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय कर उन्हें दंडित किया जाए। 31 मई को हुई थी छापेमारी 31 मई को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने गोरस भंडार में छापा मारकर दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच की थी। इसके बाद दूध संकलन और बिक्री पर रोक लगा दी गई। इस निर्णय का असर दुग्ध उत्पादों के निर्माण पर भी पड़ा है, जिससे किसानों और दूध उत्पादकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। संकलन केंद्र तत्काल शुरू करने की मांग दूध उत्पादकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गोरस भंडार का दूध संकलन केंद्र तत्काल शुरू करने की मांग की। इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई। आंदोलन में निलेश पाटील, मधुकर कडे, गोपाल ढोले, राजू गाडे, सोमनाथ लोखंडे, मधुकर टेंभूर्णे, दयाराम मोहोडे, संजय उमरे, अमोल डवरे, नरेश होगडे, अशोक डवरे, सहायक संचालक बबनराव गायकवाड, मधुकर भोंयर, बालकृष्ण राऊत, कमलकांत राऊत, सुनील तिवारी, भारत कांबळे, दिलीप कोटेकर, दिनकर रोंडे, विलास नांदे, तुकाराम पुजारी, गजानन मोहोडे सहित सैकड़ों दूध उत्पादक उपस्थित थे।