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YAVATMAL : किसके सिर सजेगा चुनावी ताज?

Desk | Yavatmal

कांग्रेस मैदान में उतारेगी उम्मीदवार, कांबले और खेताणी समेत 17 लोगों ने लिया आवेदन पत्र; बाहरी उम्मीदवार आएगा या स्थानीय नेताओं को मिलेगा मौका? विधान परिषद चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। महाविकास आघाड़ी की ओर से कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरना लगभग तय माना जा रहा है, वहीं महायुति की तरफ से यह सीट शिवसेना को मिलने की चर्चा है। यवतमाल विधानसभा क्षेत्र के बाद अब जिले की राजनीतिक निगाहें विधान परिषद चुनाव पर टिक गई हैं। कांग्रेस के संजय कांबले और शिवसेना के पूर्व जिलाध्यक्ष चेतन खेताणी सहित कुल 17 इच्छुक उम्मीदवारों ने नामांकन आवेदन पत्र लिए हैं। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व किसे उम्मीदवार घोषित करता है। विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और विभिन्न दलों के इच्छुक नेताओं ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।

महाविकास आघाड़ी में यह सीट कांग्रेस को मिलने की संभावना के चलते पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। दूसरी ओर, महायुति में सीट बंटवारे का अंतिम निर्णय अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह सीट शिवसेना के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार मुंबई में हुई एक बैठक में इस विषय पर प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा भी हुई है। इसी कारण यह सवाल भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि पार्टी स्थानीय नेता को मौका देगी या बाहर से किसी उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी। 446 मतदाता चुनेंगे विधायक जिले की 10 नगर परिषदों और 7 नगर पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। कुल 446 मतदाता विधान परिषद के लिए विधायक का चुनाव करेंगे। चुनाव के प्रमुख मुद्दे जिले के कई पदाधिकारी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।  सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।

नागपुर विभाग से मंत्री उदय सामंत के नाम की भी चर्चा चल रही है, जबकि कुछ स्थानीय नेता भी दावेदार हैं।  यवतमाल निर्वाचन क्षेत्र में कुल 446 मतदाता हैं, जिनमें विभिन्न दलों के सदस्य शामिल हैं।  राजनीतिक गणित के अनुसार बहुजन विकास आघाड़ी के 7, वंचित बहुजन आघाड़ी के 6, निर्दलीय 5, जनता दल के 20, ग्राम दल के 2, समाजवादी पार्टी का 1 और मनसे का 1 मत होने की चर्चा है।  चुनाव में लगभग 20 उम्मीदवारों ने रुचि दिखाई है, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।  कड़े मुकाबले की संभावना विधान परिषद चुनाव में जिला परिषद, पंचायत समिति और नगर परिषद सदस्यों की संख्या निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी वजह से उम्मीदवार चयन के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। यदि प्रमुख दलों की ओर से मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारे जाते हैं, तो मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का हो सकता है। मतदाताओं के बीच भी प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है और राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। इस चुनाव में “स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा भी प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गर्माने की संभावना है।