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PUNE : 19 मौतें आखिर जिम्मेदार कौन?

Desk | Pune

महज 24 घंटे के भीतर कुछ सौ मीटर के दायरे में अलग-अलग घटनाओं और विभिन्न स्थानों पर कुल 19 लोगों की मौत होना कोई साधारण बात नहीं है। आरोप है कि इन मौतों को अलग-अलग घटनाएं दिखाने और वास्तविकता छिपाने की कोशिश की गई। शुरुआत में प्रशासन की लापरवाही सामने आई और बाद में व्यवस्था की दोहरी भूमिका भी उजागर हो गई। अब सवाल उठ रहा है कि इन 19 मौतों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? फुरसुंगी में जहरीली गैस की चपेट में आकर दम तोड़ने वाली दो महिलाओं की दर्दनाक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे। घटना के बाद गांव में कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं, लेकिन मौतों की सच्चाई सामने आने में काफी समय लग गया। स्थानीय लोगों के विरोध और सवालों के बाद कई छिपी हुई बातें सामने आने लगीं।

इतने गंभीर मामले में शुरुआत में पुलिस प्रशासन ने अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई। जहरीली गैस के रिसाव से हुई दुर्घटना के बावजूद मामले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। मीडिया रिपोर्टों में भी पुलिस की ओर से अलग-अलग जानकारी दी गई। इस दौरान खबरों को नियंत्रित करने और मामले की गंभीरता कम दिखाने के प्रयास होने के आरोप भी लगे। कुछ लोगों ने इसे सामान्य घटना बताने की कोशिश की, तो कुछ ने पूरे मामले को अलग दिशा देने का प्रयास किया। लेकिन आखिरकार सच्चाई सामने आ गई और यह स्पष्ट हो गया कि मौतों का संबंध जहरीले रसायनों और विषैली गैस से था। पिंपरी-चिंचवड़ एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, जहां हजारों लोग रोजगार के लिए आते हैं। ऐसे औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। पुणे-मुंबई महामार्ग के निकट फुरसुंगी क्षेत्र में पहले भी रसायनों, अवैध गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर स्थानीय नागरिक आवाज उठाते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि कहां थे? घटना के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय नागरिकों को सांत्वना देने के लिए भी अधिकांश जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचे। सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने के बाद कुछ राजनीतिक नेताओं ने घटनास्थल का दौरा किया। घटना के बाद कई अनुत्तरित प्रश्न सामने आए हैं। क्या स्थानीय प्रशासन को वास्तविक स्थिति की जानकारी थी? क्या मौतों की जानकारी छिपाने का प्रयास किया गया? क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई? यदि समय रहते सच्चाई सामने आ जाती तो शायद प्रशासन की इतनी किरकिरी नहीं होती। एक और महत्वपूर्ण सवाल राज्य उत्पाद शुल्क (एक्साइज) विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। विभाग का दावा है कि वह अवैध शराब और हाथभट्टियों पर नजर रखता है, नियमित छापे मारता है और कार्रवाई करता है। फिर फुरसुंगी क्षेत्र में जहरीले पदार्थों का कथित रूप से गुप्त उत्पादन कैसे चलता रहा? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर उन्होंने आंखें मूंद रखी थीं? 19 लोगों की मौत के पीछे कौन-सी अवैध गतिविधियों की श्रृंखला काम कर रही थी, इसकी गहन जांच की आवश्यकता है। जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक मृतकों के परिजनों और आम नागरिकों के मन में संदेह और आक्रोश बना रहेगा।