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NATIONAL : ‘थ्री एफ’ से बढ़ा आर्थिक खतरा

Desk | National

देश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें, रुपये की गिरावट और खाद की महंगाई के कारण आर्थिक स्थिति गंभीर होती नजर आ रही है। पिछले 15 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब सात रुपये तक बढ़ चुके हैं, जबकि सीएनजी और घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नागरिकों से ईंधन का सीमित उपयोग करने, सोने की खरीद टालने और संभव हो तो विदेश यात्राएं कम करने की अपील की है। वहीं, विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने देश में इससे भी बड़ा आर्थिक संकट आने की आशंका जताई है। इन तमाम चर्चाओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक बयान ने आर्थिक हालात को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने देश के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए ‘थ्री एफ’ का जिक्र किया।

उनके इस बयान के बाद देश की अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। क्या है ‘थ्री एफ’? निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक चुनौतियों को बताते हुए Fuel, Fertilizers और Forex Reserves यानी ईंधन, खाद और विदेशी मुद्रा भंडार को सबसे बड़ी चिंता बताया। उनके मुताबिक, फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने यही तीन सबसे बड़े संकट हैं। Fuel : ईंधन की महंगाई से बढ़ा दबाव भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ता है। पिछले दो हफ्तों में कई बार ईंधन की कीमतें बढ़ चुकी हैं, जिससे आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करके राहत क्यों नहीं देती, इस सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि यदि ईंधन पर टैक्स घटाया गया तो सरकार के राजस्व में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। ऐसे में सरकार एक तरफ महंगाई नियंत्रण और दूसरी तरफ राजस्व बचाने की दोहरी चुनौती से जूझ रही है। Fertilizers : खाद की महंगाई से खेती प्रभावित वित्त मंत्री ने दूसरा बड़ा संकट खाद की बढ़ती कीमतों को बताया। भारत की कृषि व्यवस्था बड़े पैमाने पर आयातित खाद पर निर्भर है। पोटाश, फॉस्फेट, अमोनिया और यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है।

भारत के पास पोटाश का पर्याप्त भंडार नहीं है, इसलिए किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला ‘म्युरिएट ऑफ पोटाश’ पूरी तरह आयात पर निर्भर है। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने करीब 14 अरब डॉलर की खाद आयात की थी। लेकिन खाड़ी देशों में तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर के कारण खाद की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं। इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ रहा है और आने वाले समय में खाद्यान्न महंगे होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने खाद के सीमित उपयोग की अपील की है। Forex Reserves : रुपये की गिरावट से बढ़ी चिंता ‘थ्री एफ’ का तीसरा बड़ा मुद्दा देश का विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserves है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार गिरावट देखी जा रही है और रुपया 95 के पार जाने की चर्चा है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है। साल की शुरुआत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 725 अरब डॉलर बताया गया था, लेकिन रुपये की कमजोरी और बढ़ते आयात के कारण इसमें गिरावट की आशंका जताई जा रही है। भारत को कच्चा तेल, सोना  र खाद जैसी जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है। ऐसे में फॉरेक्स रिजर्व में कमी देश के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आर्थिक संकट और गहराने की आशंका एक तरफ बढ़ती महंगाई, दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों में उछाल, रुपये की गिरावट और खाद की बढ़ती लागत ने आम लोगों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा खुद आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार किए जाने के बाद हालात की गंभीरता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए कौन से फैसले लेती है और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।