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NAGPUR : प्रतिबंधित गुटखा का खुला कारोबार

Desk | Nagpur

राज्य में गुटखा, खर्रा और अन्य तंबाकूयुक्त पान मसाला उत्पादों पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद नागपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी खुलेआम बिक्री जारी है। पारशिवनी तहसील के देवला पार तथा रामटेक थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खर्रा, राजश्री, विमल और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने का मामला सामने आया है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार पारशिवनी, रामटेक, कन्हान और देवला पार क्षेत्र की अनेक किराना दुकानों, पान ठेलों और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं। राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसका पालन प्रभावी रूप से नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक निगरानी की कमी के कारण यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में नागपुर शहर में अन्न एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त के रूप में तुकाराम मुंडे ने पदभार संभालने के बाद शहर में गुटखा और खर्रा बेचने वालों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। उनके नेतृत्व में शहर के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी और कार्रवाई की गई, जिससे अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सख्त कार्रवाई अब तक देखने को नहीं मिली है,

जिसके कारण वहां प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री बेरोकटोक जारी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों की टीमें, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और अधिक बढ़ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार पड़ोसी राज्यों से तंबाकू उत्पादों की तस्करी कर इन्हें नागपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। अनुमान है कि पारशिवनी और रामटेक तहसील में लगभग 1000 से 1500 दुकानें ऐसे प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह कारोबार काफी बड़े पैमाने पर संचालित होने की चर्चा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कम उम्र के बच्चे और किशोर भी इन उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 10 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में गुटखा और खर्रा सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। इससे कैंसर, मुख रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि नागपुर शहर की तर्ज पर रामटेक, पारशिवनी, देवला पार और कन्हान जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाकर प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। साथ ही अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर युवाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित की जाए। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।